हनुमान जयंती | Hanuman Jayanti 2024

हनुमान जयंती एक हिन्दू पर्व है जिसमे भगवान हनुमानजी का जन्मदिवस को काफी जश्न के साथ धुम धाम से मनाया जाता हैं | Hanuman Jayanti हिन्दू धर्म के अनुयायियों के द्वारा मनाया जाने वाला काफी प्रशिद्ध पर्व है | इसे भारत देश के अलावा अन्य देशो में भी मनाया जाता है. चूंकि भारतवर्ष में हिन्दू धर्म के अनुयायियों की जनसंख्या सभी धर्म के अनुयायियों के मुकाबले काफी ज्यादा है इसलिए भारत देश में इस पर्व की बहुत धूम धाम देखी जाती है हालाकि बाकी देशो में भी इस दिन हिन्दू धर्म के लोगो के द्वरा वत् आदि रखा जाता है तथा इस दिन हनुमानजी का विशेष पूजन किया जाता है | यह चैत्र माह की पूर्णिमा को मनाया जाता है|  इस दिन हनुमानजी का जन्म हुआ था और व चिरजीवी है मतलब त्रेता युग से अभी तक जीवित है और श्री राम जी का नाम जाप कर रहे है| हनुमान जी को कलयुग में सबसे प्रभावशाली देवताओ में से एक माना जाता है |

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साल में दो बार आती है हनुमान जयंती ?

जयंती अथार्त जिस दिन उनका जन्म हुआ था | हनुमान जयंती वर्ष में दो बार मनाई जाती है | पहली हिन्दू कैलंडर के अनुसार चेत्र शुक्ल पूर्णिमा को अर्थात गेगोरियन कैलेंडर के मुताबिक मार्च या अप्रैल के बीच और दूसरी कार्तिक कृष्णा चतुर्दशी अर्थात नरक चतुर्देशी को अर्थात सितम्बर- अक्टूबर के बीच | इसके अलवा तमिलानाडु और केरल में हनुमान जयंती मार्गशीर्ष माह की अमावस्या को तथा उड़ीसा मे वेशाख महीने के पहले दिन मनाई जाती है | आखिर सही क्या है ?

चेत्र पूर्णिमा को मेष लग्न और चित्रा नशत्र में प्रातः 6:03 बजे हनुमानजी का जन्म एक गुफा में हुआ था| मतलब यह की चेत्र माह में उनका जन्म हुआ था | फिर चतुर्दशी क्यो मनाते है? वाल्मिकि रचित्र रामायण के अनुशार हनुमानजी का जन्म कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की  चतुर्दशी को मंगलवार के दिन, स्वाति नक्षत्र और मेष लग्न में हुआ था |

एक तिथि की विजय अभिनन्दन महोत्सव के रूप में जबकि दूसरी तिथि को जन्मदिवस के रूप मैं मनाया जाता है | पहेली तिथि के अनुसार इस दिन हनुमानजी सूर्य को फल समझ कर खाने के लिए दोडे थे, उसी दिन राहु भी सूर्य को अपना ग्रास बनाने के लिए आया हुआ था लेकिन हनुमानजी को देखकर सूर्यदेव ने उन्हें दूसरा राहु समझ लिया | इस दिन चैत्र माह की पूर्णिमा थी जबकि कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी को उनका जन्म हुआ था | एक अन्य मान्यता के अनुसार माता सीता ने हनुमानजी की भक्ति और समर्पण को देखकर उनको अमरता का वरदान दिया था | यह दिन नरक चतुर्दशी का दिन था | हालाकि वाल्मिकीजी ने जो लिखा है उसे सही माना जा सकता है | श्रीराम जी के जन्म के पूर्व हनुमानजी का जन्म हुआ था| प्रभु श्रीराम जी का जन्म 5114 ईसा पूर्व अयोध्या में हुआ था |

हनुमान जयंती में महिलओं के लिए नियम

हनुमान जयंती में जब भगवान हनुमान जी की पूजा की जाती है तब महिलाओ को कुछ नियमो का पालन करना चाहिए, मान्यता है कि चुकि हनुमान जी बाल ब्रह्मचारी थे, वही वो हमेशा स्त्रियों के स्पर्श से दूर रहते थे, इसलिए मान्यता के अनुसार हनुमान जयंती के दिन  पूजा करते वक्त  महिलाऔ को कुछ बातो का ज़रूर से ध्यान रखना चहिए:

  • हनुमान जी को सिंदूर का लेप न लगाए |
  • हनुमान जी को चोला नही चढाना चाहिए |
  • हनुमान जी को जनेऊ न पहनाए |
  • बजरंग बाण का पाठ न करे |
  • पूजा करते वक्त हनुमान जी की मूर्ति का स्पर्श न करे |
  • अगर आप चाहे तो हनुमान जयंती के दिन हनुमान जी के चरणों में दीपक प्रज्जवलित कर सकती हें. इसमें कोई परेशानी की बात नही है |

हनुमान जयंती 2023 (शुभ मुहूर्त)

हिन्दू पंचांग के अनुसार हर साल चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को हनुमान जयंती का पर्व मनाया जाता है | साल 2023 में हनुमान जयंती का शुभ मुहूर्त चैत्र माह की पूर्णिमा तिथि 5 अप्रैल 2023 को सुबह 9 बजकर 19 मिनट से शुरू होगा और चैत्र पूर्णिमा तिथि का समापन 06 अप्रैल 2023 को सुबह 10 बजकर 04 मिनट पर होगा |

  • हनुमान जी की पूजा का शुभ (ऊतम मुहूर्त 06 अप्रैल 2023 को सुबह 06.06 – सुबह 07.40 मिनट के मध्य है|
  • 06 अप्रैल 2023 को अभिजीत मुहूर्त 12.02 से दोपहर 12.53 तक है|

लाभ ( उत्रति ) – दोपहर 12.24 – दोपहर 01.58

हनुमान जयंती पर पूजा की विधि

  • हनुमान जयंती का उपवास रखने वाले व्यक्ति को ब्रम्हचर्य का पालन करना होता है |
  • बजरंगबली जन्मोत्सव के दिन ब्रहम्मुरत में उठकर भगवान राम, माँ सीता और हनुमानजी की पूजा की जाती है |
  • सुबह नहा कर हनुमान जी की मूर्ति को अपने घर पर स्थापित करे और विधिवत तरीके से उनकी पूजा करे |
  • हनुमान जी की मूर्ति का स्नान कराए पर सिंदूर, गुलाल, चन्दन, अबीर, चावल चडाए |
  • हनुमान जी को फूलो को माला पहनाए और नारियल चड़ाए |
  • अब हनुमान जी की मूर्ति के ह्दय वाले स्थान पर चन्दन से जय श्री राम लिखे |
  • अब अपने स्थान पर बैठकर हनुमान चालिसा या सुन्दरकाड का पाठ करे |
  • इश्के बाद हनुमान जी को तिलक लगाकर उनकी आरती करे और प्रसाद को सभी को बाटे |
हनुमान जयंती को कब और कैसे मनाते हैं

प्रभु श्री हनुमान,भगवान श्री राम के बहुत बड़े भक्त, पुरे भारत में हिन्दू धर्म के लोगो के द्वारा प्रभु श्री राम में अपनी गहरी आस्था के कारण पूजे जाते है | हनुमान जयंती के दिन पर, सभी हनुमान मंदिरों में बहुत अधिक भीड़ हो जाती है, क्योंकि लोग सुबह पवित्र स्नान करने के बाद से ही इनकी पूजा करना करते है| हनुमान जयंती हिन्दू धर्म के लोगो के द्वारा हिन्दुओ के एक महत्वपूर्ण त्य्होर के रूप में बड़े उत्साह और जोश के साथ मनाई जाती है| यह एक महान हिन्दू उत्सव है, जो सांस्कृतिक और परंपरागत तरीके से मनाया जाता है|

लोग हनुमान भगवान की पूजा आस्था,जादुई शक्तियों, ताकत और उर्जा के प्रतिक के रूप में करते है| लोग हनुमान चालीसा का पाठ करते है, क्युकी यहाँ बुरी शक्तिया का विनाश करने और मन को शांति प्रदान करने की छमता रखती है| इस दिन हनुमान भक्त सुबह जल्दी नहाने के बाद भगवान हनुमान जी के मंदिर जाते है और हनुमान जी की मूर्ति पर लाल सिंदूर (का चोला) चडाते है, हनुमान चालीसा का पाठ करते है, लड्डू का प्रसाद चडाते है, मंत्रो का जाप करते हुए आरती करते है, मंदिर की परिक्रमा अदि बहुत साडी रस्मे करते है|

जैसा कि सभी जानते है की, हनुमान जी का जन्म वानर समुदाय में लाला-नारंगी शारीर के साथ हुआ था, इसी कारण, सभी हनुमान मंदिरों में लाल-नारंगी रंग की हनुमान जी की मूर्ति होती है| पूजा के बाद, लोग अपने मस्तिषक (माथे) पर प्रसाद के रूप में लाल सिंदूर को लगते है और भगवन हनुमान जी से मांगी गई अपनी इच्छाओ की पूर्ति के लिए लोगो को लड्डू के प्रसाद का वितरण करते है | महाराष्ट्र में, यहाँ कैलेंडर के अनुसार चेत्र महीने की पूर्णिमा को मनाया जाती है| यघपि, अन्य हिन्दू कैलेंडर के अनुसार, यहाँ आश्विन माह के अंधेरे पक्ष में 14वे दिन पड़ती है| पूजा के बाद, पूरा आशीर्वाद पाने के लिए लोगो में प्रसाद बाटा जाता है|

तमिलनाडु और केरल में, यहाँ मार्गशीर्ष माह (दिसम्बर और जनवरी के बिच में) में, इस विश्वास के साथ मनाई जाती है की, भगवन हनुमान इस महीने की अमावश्या को पैदा हुए थे| उड़ीसा में, यह वैशाक (अप्रैल) महीने के पहले दिन मनाई जाती है| अर्नातक और आंध्र प्रदेश में यहाँ वेशाख महिने केक 10वे दिन मनाई जाती है, जो चेत्र पूर्णिमा से शुरू होती है और वैशाख महीने के और 10वे दिन कृष्ण पक्ष पर ख़त्म होती है|

जयंती मनाने हनुमान का महत्व

हनुमान जयंती का समारोह प्रक्रति के अद्भुत प्राणी के साथ पूरी हनुमान प्रजाति के सह-अस्तित्व में संतुलन की और संकेत करता है| प्रभु हनुमान वानर समुदाय से थे, और हिन्दू धर्म के लोग हनुमान जी की एक देवीय जिव के रूप में पूजते है| यह त्य्होर सभी के लिए बहुत अधिक महत्व रखता है, हालाँकि ब्रम्हचारी, पहलवान और बलवान इस समारोह की और से विशेष रूप से प्रेरित होते है| हनुमान जी अपने भक्तो के बिच में बहुत से नामोंसे जाने जाते है, जैसे- बजरंगबली, पवनसुत, पवन कुमार, महावीर, बालिबिमा, मारुतसुत, संकट मोचन, अंजनिसुत, मारुति, अदि| हनुमान अवतार को महान शक्ति, ताकत, ज्ञान, देवीय शक्ति, बहादुरी, बुद्धिमत्ता, निःस्वार्थ सेवा-भावना अदि गुणों के साथ भगवान शिव का 11वा रूद्र अवतार मन जाता है| इन्होने अपना पूरा जीवन भगवान श्री राम और माता सीता की भक्ति में लगा दिया और बीना किसी उद्देश्य के कभी भी अपनी शक्तियों का प्रदर्शन नही किया| हनुमान भक्त हनुमान जी की प्रार्थना उनके जैसा बल, बुद्धि, ज्ञान का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए करते है| इनके भक्तो के द्वारो इनकी पूजा बहुत से तरीको से की जाती है; कुछ लोग अपने जीवन में शक्ति, प्रसिद्धि, सफलता, अदि प्राप्त करने के लिए बहुत समय तक इनका नाम का जाप करने के द्वारा ध्यान रखते है, वही कुछ लोग इस सब के लिए हनुमान चालीसा का जाप करते है|

हनुमान जयंती को मानाने के पीछे का इतिहास 

एकबार, एक महान संत अंगिरा स्वर्ग के स्वामी, इंद्र से मिलने के लिए स्वर्ग गए और उनका स्वागत स्वर्ग ली अप्सरा, पुन्जिछथला के साथ किया गया| हालांकि, संत को इस तरह के नृत्य में कोई रूचि नही थी, उन्होंने उसी स्थान पर उसी समय अपने प्रभु का ध्यान करना शुरू कर दिया| नृत्य के अंत में, इंद्र ने उनसे नृत्य के प्रदर्शन के बारे में पूछा| वे उस समय चुप थे और उन्होंने कहा कि, में अपने प्रभु के गहरे ध्यान में था, क्युकी मुझे इस तरह के नृत्य प्रदर्शन में कोई रूचि नही है| यह इंद्र और अप्सरा के लिए बहुत अधित लज्जा का विषय था; उसने संत को निराश करना शुरू कर दिया और तब अंगीरा ने उसे शाप दिया कि, “देखो! तुमने स्वर्ग से प्रथ्वी को निचा दिखाया है| तुम पर्वतीय क्षेत्र के जंगलो में मादा के रूप में पैदा हो|” उसे अपनी गलती का अहसास हुआ और संत से क्षमा याचना की| तब उस संत को उस पर थोड़ी सी दया आई और उन्होंने उसे आशीर्वाद दिया की, “प्रभु का एक महान भक्त तुमसे पैदा होगा| वह सदेव परमात्मा की सेवा करेगा|” इसके बाद वह कुंजार (प्रथ्वी पर बंदरो के राजा) की बनती बनी और उनका विवाह सुमेरु पर्वत के राजा केसरी से हुआ| उन्होंने पांच दिव्य तत्वों; जैसे- ऋषि अंगीरा का शाप और आशीर्वाद, उसकी पूजा, भागवान शिव का आशीर्वाद, वायु देव का आशीर्वाद और पुत्रश्रेष्ठी यज्ञ से हनुमान को जन्म दिया| यह मन जाता है की, भगवन शिव ने पृथ्वी पर मनुष्य के रूप पुनर्जन्म 11वे रूद्र अवतार क्र रूप में हनुमान वनकर जन्म लिया; क्युकी वे अपने वास्तिविक रूप में भगवान श्री राम की सेवा नही कर सकते थे| सभी वानर समुदाय सहित मनुष्यों को बहुत ख़ुशी हुई और महँ उत्साह और जोश के साथ नाचकर, गाकर, और बहुत सी अन्य खुशियों वाली गतिविधियों के साथ उनका जन्मदिन मनाया| तब से ही यहाँ दिन, उनके भक्तो के द्वारा उन्ही की तरह ताकत और बुद्धिमत्ता प्राप्त करने के लिए हनुमान जयंती को मनाया जाता है|

हनुमान मंत्र:

“मनोजवं मारुततुल्यवेगम् जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठम|

वातात्मजं वानरयूथमुख्यं श्री रामदूतं शरणम प्रपघे |

हनुमान जयंती की कथा

वानर जाति में जन्मे हनुमान जी को बजरंगबली,केसरीनंदन,अंजनीपुत्र,पवनपुत्र कहा जाता हैं| पौराणिक कथा अनुसार जब राजा दशरथ अपने महल में पुत्र प्राप्ति के लिए हवन करा रहे थे| हवन के पुरे होने पर पंडित द्वारा प्रसाद के रूप में खीर राजा दशरथ की तीन रानियों को बांटी गयी उसी समय एक पक्षी द्वारा खीर का थोडा सा भाग अपनी चोच में भरकर अंजनी के आश्रम में ले जाया गया| अंजनी माता उस समय तपस्या में लीन थी उसी समय पक्षी के मुह से खीर गिर कर अंजनी माता के हाथ में आ गयी| इस खीर को माता अंजनी ने भगवान शंकर का प्रसाद समझकर ग्रहण किया| इस प्रसाद को पाकर माता अंजनी के घर में भगवान शिव के ग्यारहवे अवतार बाल हनुमानजी ने जन्म लिया था| जिस दिन हनुमानजी का जन्म हुआ था उस दिन चेत्र माह की शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि पड़ रही थी |

FAQ :

Q1. हनुमान जी का जन्मदिन कब मनाया जाता है ? : हिन्दू कैलंडर के अनुसार चेत्र शुक्ल पूर्णिमा को अर्थात गेगोरियन कैलेंडर के मुताबिक मार्च या अप्रैल के बीच माना जाता है |

Q2. हनुमान जयंती 2023 में कब है ? : हनुमान जयंती 2023 में 6 अप्रैल को है |

Q3. हनुमान जयंती साल में दो बार क्यों मनाई जाती है ? : हनुमान जयंती वर्ष में दो बार मनाई जाती है, पहली हिन्दू कैलंडर के अनुसार चेत्र शुक्ल पूर्णिमा को अर्थात गेगोरियन कैलेंडर के मुताबिक मार्च या अप्रैल के बीच और दूसरी कार्तिक कृष्णा चतुर्दशी अर्थात नरक चतुर्देशी को अर्थात सितम्बर-अक्टूबर के बीच |

Q4. हनुमान जी को क्या चढ़ाएं ? : हनुमान जी को चना-गुड अति प्रिय है उसका भोग लगाये, इअके अलावा हनुमान जी की मूर्ति पर सिंदूर का लेप करे और हनुमान जी को चमेली फूलो की माला पहनाए और नारियल चड़ाए |

Conclustion : भगवान हनुमानजी का जन्मदिवस को काफी जश्न के साथ धुम धाम से मनाया जाता हैं| हनुमान जयंती हिन्दू धर्म के अनुयायियों के द्वारा मनाया जाने वाला काफी प्रशिद्ध पर्व है | इसे भारत देश के अलावा अन्य देशो में भी मनाया जाता है. चूंकि भारतवर्ष में हिन्दू धर्म के अनुयायियों की जनसंख्या सभी धर्म के अनुयायियों के मुकाबले काफी ज्यादा है इसलिए भारत देश में इस पर्व की बहुत धूम धाम देखी जाती है हालाकि बाकी देशो में भी इस दिन हिन्दू धर्म के लोगो के द्वरा वत् आदि रखा जाता है तथा इस दिन हनुमानजी का विशेष पूजन किया जाता है |

सुचना : इस लेख में बताई गई बाते किसी सटीकता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं है। विभिन्न माध्यमों से संग्रहित कर ये जानकारियां आप तक पहुंचाई गई हैं। हमारा उद्देश्य महज सूचना पहुंचाना है, इसके उपयोगकर्ता इसे महज सूचना समझकर ही लें। इसके अतिरिक्त, इसके किसी भी उपयोग की जिम्मेदारी स्वयं उपयोगकर्ता की ही रहेगी ।

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